| शाम का समय था मैं दफ्तर के लिए लेट हो रहा था। सरपट चला जा रहा था। इतने में देखता हूँ की सड़क के किनारे एक मंच पर कुछ लोग नेता के वेशभूषा मैं बैठे हैं। मौका था उत्तरप्रदेश की जलेषर विधान सभा से संसद एस पी बघेल के बसपा में शामिल होने के जश्न का। नेता vahee पर partee बदल गई। विचारधारा बदल गई। कल तक जिसे पूजते थे अब उनको देखना तक नहीं चाहते। मंच पर महापुरुषों की तस्वीरें भी बदल गईं। जहाँ पहले मंच पर लोहिया, मुलायम, शिवपाल यादव की तस्वीरें हुआ करतीं थीं अब वहीं उनकी जगह पर आंबेडकर, कांसी राम और मायावती ने ले लिया था।sochne ka visay hai ki ऐसा एक ही रात में क्या हो गया की समाजवाद से राजनीती का ककहरा पड़ने वाले की रातो रात राजनीतिक विचारधारा बदल गई दरअसल आज के राजनेताओं की कोई विचारधारा ही नही रह गई है। अब तो राजनेता अपना व्यक्तिगत स्वार्थ साधने में लगे हैं। जहाँ लाभ का पद मिला वही दोना उठाये चल दिए।चाटने। एस पी बघेल ने भी वही किया। मुलायम ने बघेल को एक दरोगा से सांसद बनाया और अब उनहोंने बसपा का दमन थाम लिया। कहने का तात्पर्य अब राजनीती का मकसद जन सेवा नहीं बल्की आत्म सेवा रह गई है। |
Thursday, August 14, 2008
पॉलिटिक्स बिसिनेस हो गया है
Thursday, January 31, 2008
तारे जमीन पर
हल ही में मैंने मशहूर फिल्म अभिनेता आमिर खान द्वारा अभिनीत और निर्देशित फिल्म तारे जमीन पर देखी। मुझे यह कहने में तनिक भी हिचक नहीं है कि गंभीर ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर बनी यह फिल्म अपने आप में बेमिशाल है। इस फिल्म में मासूमों पर माता पिता की अपेछाएं कैसे हावी हैं इसे बखूबी और बडे ही मार्मिक रुप से पेश किया है। आज विद्यालयों में आसानी से देखा जा सकता है कि मानसिक रुप से कमजोर बच्चों को किस तरंह प्रताडित किया जाता है। इसमें न सिर्फ टीचर शामिल हैं बल्कि खुद माता पिता भी बराबर के दोषी हैं। आज यह एक जवालंत समस्या है। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
Subscribe to:
Comments (Atom)