| शाम का समय था मैं दफ्तर के लिए लेट हो रहा था। सरपट चला जा रहा था। इतने में देखता हूँ की सड़क के किनारे एक मंच पर कुछ लोग नेता के वेशभूषा मैं बैठे हैं। मौका था उत्तरप्रदेश की जलेषर विधान सभा से संसद एस पी बघेल के बसपा में शामिल होने के जश्न का। नेता vahee पर partee बदल गई। विचारधारा बदल गई। कल तक जिसे पूजते थे अब उनको देखना तक नहीं चाहते। मंच पर महापुरुषों की तस्वीरें भी बदल गईं। जहाँ पहले मंच पर लोहिया, मुलायम, शिवपाल यादव की तस्वीरें हुआ करतीं थीं अब वहीं उनकी जगह पर आंबेडकर, कांसी राम और मायावती ने ले लिया था।sochne ka visay hai ki ऐसा एक ही रात में क्या हो गया की समाजवाद से राजनीती का ककहरा पड़ने वाले की रातो रात राजनीतिक विचारधारा बदल गई दरअसल आज के राजनेताओं की कोई विचारधारा ही नही रह गई है। अब तो राजनेता अपना व्यक्तिगत स्वार्थ साधने में लगे हैं। जहाँ लाभ का पद मिला वही दोना उठाये चल दिए।चाटने। एस पी बघेल ने भी वही किया। मुलायम ने बघेल को एक दरोगा से सांसद बनाया और अब उनहोंने बसपा का दमन थाम लिया। कहने का तात्पर्य अब राजनीती का मकसद जन सेवा नहीं बल्की आत्म सेवा रह गई है। |
Thursday, August 14, 2008
पॉलिटिक्स बिसिनेस हो गया है
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4 comments:
पॉलिटिक्स बिजनिस हो गया है
आपने इकदम कटु सत्य कहा है.
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धन्यवाद. आगे भी लिखते रहिये.
दरअसल आज के राजनेताओं की कोई विचारधारा ही नही रह गई है।
धन्यवाद. आगे भी लिखते रहिये.
अच्छा लिखा है। चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। लगातार लिखते रहें।
जी बिल्कुल सही,लेकिन बिजिनेस का भी अपना एक उद्देश्य ,कम करने का तरीका होता है,राजनीती में तो सब ख़त्म है.
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