दर्द को दिल से निकलने का बहाना मिल जाये,खुल के रो लूं जो मुझे भी कोई साना मिल जाये,उनके कूचे की तरफ निकल तो दिए हैं मगर,कहीं ऐसा न हो कि जमाना मिल जाये.ये बात अलग है कि तुम ना बदले,मगर जमाना बदल रहा है.गुलाब पत्थर पर खिल रहे हैं,चराग आंधी में जल रहे हैं.
No comments:
Post a Comment